कौन सा वह गीत गाना चाहता है
कौन सा वह गीत गाना चाहता है।
फिर नया कोई बहाना चाहता है।।
घर जलाकर आगया मातम मनाने,
कौन सा रिश्ता निभाना चाहता है।
नींद से उठकर अभी वह नींद में है,
यह जहां सर पर उठाना चाहता है।
है हमें मालूम आखिर क्या है वो,
जो नहीं वह वो,दिखाना चाहता है।
खौफ का मंजर भी है मातम भी है,
देखकर क्यों मुस्कुराना चाहता है।
है बहुत पिछड़ा हुआअंदाज उसका,
पंक्ति में पहली वो आना चाहता है।
वार से उसके यहाँ, घायल सभी हैं,
फिर भला कैसा निशाना चाहता है।
ठोकरें देकर गिराया था मुझे जो,
आज पलकों पे बिठाना चाहता है।
रचना-लालबहादुर चौरसिया "लाल"
गोपालगंज, आजमगढ़
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