उजाले हैं पड़े घायल
उजाले हैं पड़े घायल, अंधेरे मन में ऐठे हैं। घुटन दिल में समाई है, लिए हम भूख बैठे हैं।। चुभन रह रह के सीने में, किए जाती हमें घायल, जलाती जिस्म गर्मी की, लिए बस धूप बैठे हैं। बँहक कर आ गए सपने, छलावा देके जाते हैं, तरासो तोड़ दो चाहे, शिला का रूप बैठे हैं। घड़ी भर के लिए खुशियां, ठहरती ही नहींआंगन, मुहाने पर मेरे अगणित, गमों के कूप बैठे हैं। दिलाने हक हमारा जो, खड़े हैं शांत दर्शक बन, बताएंगे मिले मौका, अभी...