दर्द मेंं मुस्कराना हमें आ गया

दर्द में मुस्कुराना........हमें आ गया।
याद  गुजरा  जमाना   हमें आ गया।।

भावनाएं  थिरकने  लगीं  आजकल,
ख्वाब दिल में सजाना हमें आ गया।

रूठ जाए अगर वो तो कुछ ग़म नहीं,
किस  कदर है  मनाना हमें आ गया।

एक  अरसे  से  जो  गुनगुनाया  नहीं,
प्यार  का  वो  तराना  हमें  आ गया।

काट डालेगी नफरत की बुनियाद जो,
तीर  ऐसा  चलाना...... हमें आ गया।

आंसुओं  को  तुम्हारे  मैं  पी जाऊंगा,
दोस्त  बनके  हंसाना  हमें  आ  गया।

खिल  उठा  आज  मासूम चेहरा मेरा,
ख्याल  साथी  पुराना  हमें  आ  गया।

"लाल" रिश्ता कोई जोड़ लो तुम यहां,
सारे  रिश्ते  निभाना  हमें  आ  गया।।

रचना-लालबहादुर चौरसिया "लाल"
मो.9452088890

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