भावनायें नया गीत गाने लगी।

भावनायें   नया   गीत   गाने  लगी।
पास आके वो' जब मुस्कराने लगी।।

इन फिजाओं में जब पाँव उनके पड़े,
हर  कली  जश्न  में डूब  जाने लगी।।

उड़के आयी कहीं से मचलती पवन,
डाल  की  पत्तियां  गुनगुनाने  लगी।।

रूप को  देख  कर  रातरानी खिली,
खुशबुओं  की  लड़ी दूर जाने लगी।।

हौसलों के  समन्दर  मे हलचल हुई,
बाँह में  वो  मेरे  जब  समाने  लगी।।

ढूढती थी  नजर  जिन सवालात को,
उन सवालों का हल लाल पाने लगी।।
✍️लालबहादुर चौरसिया लाल

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